144 imposed in Panchkula before the verdict in the famous Ranjit murder case, the court has to pronounce the sentence today | पंचकूला में धारा 144 लागू; डेरामुखी समेत 5 लोग दोषी हैं, CBI की विशेष अदालत सुनाएगी रणजीत सिंह हत्याकांड में फैसला

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12 मिनट पहले

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डेरा सच्चा सौदा संत गुरमीत राम रहीम इंसां 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद हेलीकॉपटर पर जेल लेजाया गया था। - Dainik Bhaskar

डेरा सच्चा सौदा संत गुरमीत राम रहीम इंसां 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद हेलीकॉपटर पर जेल लेजाया गया था।

साध्वियों के योन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम इंसां को पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत की तरफ से रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में सजा सुनाई जानी है। जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। फैसला आने से पहले ही पंचकूला डिप्टी कमिश्नर आफ पुलिस मोहित हांडा ने जिले में धारा 144 की लागू कर दी है। पंचकूला में 5 या इससे ज्यादा लोगों के इक्ट्‌ठा होने पर पाबंदी है। रंजीत सिंह हत्या मामले के मुख्य आरोपी गुरमीत राम रहीम इंसां की रोहतक सुनारिया जेल से वीडियो कानफ्रेंसिंग के जरिए पेशी होगी। जबकि आरोपी कृष्ण लाल, अवतार, सबदिल और जसबीर प्रत्यक्ष रूप से पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश होंगे । डीसीपी मोहित हांडा के अनुसार आज जारी किए गए आदेशों के तहत राम रहीम सहित 5 आरोपियों की सजा के ऐलान के चलते जिले में जान व माल के नुकसान, जिले में किसी भी तरह का तनाव पैदा करने, शांति भंग करने और दंगों की आशंकाओं को देखते हुए लागू किए गए हैं। इसके तहत पंचकूला डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के साथ लगते सेक्टर 1,2,5,6 और संबंधित क्षेत्र में पड़ने वाले नेशनल हाईवे पर किसी भी व्यक्ति द्वारा तलवार( धार्मिक प्रतीक कृपाण के अलावा) लाठी, डंडा, लोहे की रॉड, बरछा, चाकू, गंडासी, जेली, छतरी या अन्य हथियार लेकर घूमने पर पूर्णतया प्रतिबंध है। साथ ही इन क्षेत्रों में 5 या 5 से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर भी पूर्णतया प्रतिबंध है। इसका उल्लंघन करने वाले के खिलाफ IPC की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डेरा प्रमुख को सजा के बाद पंचकूला में भड़क गए थे दंगे
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम इंसां को 27 अगस्त 2017 को सीबीआई अदालत की तरफ से साधवियों के दुष्कर्म मामले में सजा सुनाई गई थी। इस दौरान डेरा सच्चा सौदा के हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र हो गए थे। इस दौरान पुलिस को लाठी बल का इस्तेमाल करना पड़ा था। कई डेरा प्रेमियों की इस दौरान मौत भी हो गई थी और कई ऐसे हैं जिनका आज तक पता नहीं चल पाया है। यही नहीं इस दौरान पंचकूला में बड़े स्तर पर तोड़ फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुई थीं। जिसके बाद प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे थे। यही कारण है कि इस बार यहां पर धारा 144 लगाई गई है और लोगों को एकत्र नहीं होने दिया जा रहा है और डेरा प्रमुख की पेशी भी वीडियो कानफ्रेंस के जरिए करवाई जा रही है।

10 जुलाई 2002 को मारी गई रणजीत सिंह को गोलियां

10 जुलाई 2002 को सच्चा सौदा डेरे की मैनेजमेंट कमेटी के मेंबर रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। डेरे के ही कुछ अनुयायियों के अनुसार, डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने ही साध्वी यौन शोषण मामले में अपनी बहन से गुमनाम चिट्ठी लिखवाई। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत सिंह के पिता ने जनवरी 2003 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने बेटे की हत्या की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया। सीबीआई ने इस मामले में डेरामुखी राम रहीम समेत 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। 2007 में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए और 8 अक्टूबर 2021 को उन्हें दोषी करार दे दिया।

तीन लोगों की गवाही रही अहम

रणजीत सिंह हत्याकांड में 3 लोगों की गवाही महत्वपूर्ण रही। इनमें से 2 चश्मदीद गवाहों सुखदेव सिंह और जोगिंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि उन्होंने आरोपियों को रणजीत सिंह पर गोली चलाते देखा। तीसरा गवाह डेरामुखी का ड्राइवर खट्टा सिंह रहा। खट्‌टा सिंह के अनुसार, उसके सामने ही रणजीत सिंह को मारने की साजिश रची गई। खट्टा सिंह ने अपने बयान में कहा कि डेरामुखी राम रहीम ने उसके सामने ही रणजीत सिंह को मारने के लिए बोला। केस की शुरुआती सुनवाई के समय खट्टा सिंह अदालत में इस बयान से मुकर गया मगर कई साल बाद वह फिर कोर्ट में पेश हुआ और गवाही दी। उसकी गवाही के आधार पर ही पांचों को दोषी ठहराया गया।

रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरामुखी को हो चुकी उम्रकैद

डेरे में साध्वियाें के यौन शोषण से जुड़े केस में जो लैटर लिखे गए, उन्हीं के आधार पर सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में खबरें प्रकाशित की। इन खबरों के बाद रामचंद्र छत्रपति पर पहले दबाव बनाया गया और जब वह धमकियों के आगे नहीं झुके तो 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा में रामचंद्र छत्रपति के घर के बाहर उन्हें गोली मार दी गई। 28 दिन बाद, 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र छत्रपति ने दम तोड़ दिया। शुरुआत में इस केस में डेरामुखी राम रहीम का नाम नहीं था मगर 2003 में हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद 2006 में डेरामुखी के ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान के आधार पर डेरामुखी का नाम इस हत्याकांड में शामिल किया गया। इस केस में डेरामुखी को मुख्य आरोपी बनाया गया। गोली कुलदीप ने मारी और निर्मल सिंह उसके साथ था। जिस रिवॉल्वर से रामचंद्र छत्रपति को गोलियां मारी गई, उसका लाइसेंस डेरे के मैनेजर किशनलाल के नाम पर था। 11 जनवरी 2018 को कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरामुखी राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और किशन लाल को दोषी करार दिया। कोर्ट ने राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का दोषी माना। उसके बाद चारों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

यौन शोषण मामले में काट रहा 20 साल की सजा

डेरे की दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में 28 अगस्त 2017 को डेरामुखी राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गई। तब पंचकूला में सीबीआई कोर्ट द्वारा डेरामुखी को दोषी ठहराए जाने के बाद पंजाब-हरियाणा और राजस्थान समेत 5 राज्यों में डेरे के अनुयायी हिंसा पर उतर आए जिसमें 31 लाेग मारे गए और 250 से ज्यादा घायल हुए। दिल्ली में ट्रेन के दो खाली डिब्बे जला दिए गए। पंचकूला में जमे डेरे के डेढ़ लाख अनुयायी 3 घंटे तक हिंसा करते रहे। पंचकूला के अलावा पंजाब के पटियाला, फाजिल्का, फिरोजपुर, मानसा और बठिंडा में कर्फ्यू लगाना पड़ा। यूपी के लोनी में भी हिंसा हुई। इस हिंसा से नाराज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नुकसान की भरपाई के लिए डेरे की संपत्ति जब्त करने को कहा। उस केस में जब जज जगदीप सिंह ने डेरामुखी को दोषी ठहराया तो वह रो पड़ा। उसे पंचकूला से हेलिकॉप्टर के जरिये सीधे रोहतक की सुनारिया जेल ले जाया गया। तब से डेरामुखी रोहतक जेल में ही बंद है।

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