Forgetting the orgy of death, the employment rate is better, in the book UP model policy, strategy and results, only praise the Yogi government. Kanpur | मौत के ताण्डव को भूल रोज़गार की दर को बताया बेहतर, पुस्तक यूपी मॉडल नीति, युक्ति और परिणाम में सिर्फ योगी सरकार की तारीफ

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कानपुर33 मिनट पहले

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आईआईटी कानपुर। - Dainik Bhaskar

आईआईटी कानपुर।

देश के अन्य राज्यों की तरह, कोरोना की दूसरी लहर में उत्तर प्रदेश भी कोरोना संक्रमण की चपेट में था। पूरे प्रदेश में कोविड के केस तेजी से बढ़ते जा रहे थे। अस्पतालों में संसाधनों का संकट शुरू हो गया था, लेकिन यहां योगी सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीति ने न सिर्फ महामारी के असर को कम किया, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को जारी रखा। यह कहना है आईआईटी कानपुर के पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल का जिन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक किताब लिखी है जिसमे यूपी सरकार के मॉडल को सरहाया गया है। उनका कहना है कि जो स्थिति प्रदेश की पहली लहर में थी उसमें दूसरी लहर में काफी सुधार रहा था। जब हमने पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल से बात की तो उन्होंने भी यही कहा जो किताब में लिखा है, वह बिल्कुल सत्य है और मेरे पास इसके प्रमाण भी है।

अन्य प्रदेश में लॉकडाउन था लेकिन यूपी में नहीं…
अपनी किताब लॉकडाउन का जिक्र करते हुए प्रो अग्रवाल ने कहा, महाराष्ट्र, केरल और अन्य राज्यों में जब लॉकडाउन लगाने की नौबत आ गई थी, तब यूपी में लॉकडाउन नहीं था। अन्य राज्यों में लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए, जबकि उत्तर प्रदेश में स्थिति पहली लहर के बाद बेहतर हुई। विशेषज्ञों ने गणितीय मॉडल से संक्रमण का आकलन किया, जबकि आर्थिक गतिविधि, संसाधन, बाजार, बेरोजगारी पर शोध किया।

डाटा आईआईटी ने और सरकार ने कॉलेक्ट किया है….
प्रो. अग्रवाल के मुताबिक इस रिपोर्ट में एकत्र डेटा और सूत्र मॉडल के आधार पर, यूपी मॉडल के प्रभाव और सफलता का विश्लेषण किया है। आकलन कई प्रामाणिक स्रोतों से एकत्र किए गए डेटा पर आधारित हैं। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के अलावा आईआईटी कानपुर भी शामिल है।

पहली लहर में बेरोजगारी 11 फीसद थी जो दूसरी लहर में घट कर चार फीसद रह गयी…
उन्होंने बताया कि, मार्च 2020 में बेरोजगारी 11 फीसद थी, जो कि जून 2021 में घटकर चार फीसद रह गई। प्रदेश सरकार ने अन्य राज्यों की तरह संपूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया। निर्धारित क्षमता से औद्योगिक इकाईयों को चलने की छूट दी। संक्रमण रोकने के लिए बड़े आयोजन प्रतिबंधित किए गए। माल, सिनेमा-हाल आदि बंद रखे गए, जिससे भीड़ एकत्रित नहीं हुई। संक्रमण वाले क्षेत्रों में सामूहिक रूप से जांच हुई, जबकि महाराष्ट्र और अन्य राज्यों ने टारगेटेड जांच की। प्रदेश में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और हवाई जहाज से आने वाले यात्रियों की जांच कराई गई।

योगी ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया, लेकिन सिर्फ कागजों में…
शायद इन बीच प्रो अग्रवाल यह भूल गए कि गंगा किनारे हज़ारों की तादाद में लाशों को दफनाया गया, उन्होंने अपनी खिताब में सिर्फ योगी सरकार के गुणगान की बात ही लिखी है। बल्कि हकीकत में कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को प्रदेश के सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल रहा था। उन्होंने अपनी किताब में ऑक्सीजन के ऑडिट की बात लिखी, लेकिन जब प्रदेश के अधिकतर अस्पताल बिना ऑक्सीजन के थे तो ऑडिट कैसा। जब इस बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने कहा, प्रदेश में योगी सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर जिस तरह में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत अच्छे और सराहनीय कार्य है। इस वजह से कई लोगों को काफी फायदा हुआ है।

पूर्व के दावों से असमंजस का माहौल…
आपको बता दें प्रो अग्रवाल ने ही दूसरी लहर में सही आकलन कर पुरे देश को कोरोना के संकट से बचाया था, लेकिन जून के आखिरी हफ्ते में आये आईसीएमआर के सर्वे के बाद प्रो अग्रवाल ने यह दावा किया था की, अगर लॉकडाउन और सारी बंदिशे खोल दी जाए तो तीसरी लहर अगस्त के पहले हफ्ते या अंत तक आजाएगी। लेकिन इसके बाद उन्होंने कई नए वीडियो संदेश जारी कर दावे किये थे। आईआईटी एक ऐसा संस्थान है जिस पर राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक भरोसा करते है। उन्होंने बीच में वैक्सीन न लगाने वाले 37% लोगों को खतरा ज्यादा होने की बात कही थी। प्रो. अग्रवाल ने सितम्बर में कहा था कि, वैक्सीनेशन करा चुके 9% ऐसे भी लोग हैं, जो एंटीबॉडी खो चुके हैं या खो रहे हैं। ऐसे में इन्हें भी संक्रमण का खतरा ज्यादा है। संक्रमण से ठीक होने के 90 दिन के अंदर जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई है उन्हें भी कोरोना का ज्यादा खतरा है।

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