The situation worsened due to the departure of 10 doctors in 12 days, pregnant women are being sent home without checkup, OPD of eye diseases will be closed for the next 7 days | 12 दिन में 10 डाॅक्टर्स के जाने से बिगड़े हालात, गर्भवतियों को बिना चेकअप के ही भेजा जा रहा घर, अगले 7 दिन तक बंद रहेगी नेत्र रोग की ओपीडी

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कैथलएक घंटा पहले

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बेबसी की तस्वीर: एक डाॅक्टर और 200 से ज्यादा मरीजों के कारण फर्श पर बैठकर बारी का इंतजार करती महिलाएं। - Dainik Bhaskar

बेबसी की तस्वीर: एक डाॅक्टर और 200 से ज्यादा मरीजों के कारण फर्श पर बैठकर बारी का इंतजार करती महिलाएं।

  • मनोरोग विभाग की ओपीडी 30 सितंबर से ही बंद, सर्जरी ओपीडी में घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिल रहे डाॅक्टर
  • सरकार ने रिटायरमेंट के बाद भी नियमित रूप से सेवाएं दे रहे कंसल्टेंट को हटाने के दिए थे आदेश

जिला नागरिक अस्पताल में डाॅक्टरों की कमी के कारण हालात खराब हैं। पिछले 12 दिन में 10 डाॅक्टर अस्पताल से चले गए हैं। इनके जाने का सबसे ज्यादा असर गायनी, सर्जरी, नेत्र रोग और मनोरोग विभाग की ओपीडी पर पड़ा है। इन विभागों में या तो अब डाॅक्टर बचे ही नहीं हैं। बचे हैं सिर्फ एक डाॅक्टर हैं और उनके पास जिम्मेदारियों को बोझ कहीं अधिक है।

अस्पताल में पिछले 11 दिनों से मनोरोग की ओपीडी पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। क्योंकि विशेषज्ञ के अलावा मनारोगियों को कोई दूसरा डाॅक्टर ट्रीट नहीं कर सकता है। वहीं गायनी में सिर्फ एक डाॅक्टर से ही ओपीडी में काम चलाया जा रहा है। परिणाम ये हो रहा है गर्भवती महिलाओं को भी बिना देखा ही वापस घर भेजा जा रहा है क्योंकि एक डाॅक्टर के लिए 250 मरीजों को देखना संभव नहीं है।

ऐसे में जो 100 से 110 मरीजों को छोड़कर बाकी को लौटा दिया जाता है। सर्जरी विभाग की ओपीडी में मरीजों को डाॅक्टर के आने का घंटों इंतजार करना पड़ता है क्योंकि इनके ऊपर ओपीडी के अलावा ऑपरेशन थियेटर, वार्ड की भी जिम्मेदारी है। इमरजेंसी में क्रिटिकल केस आने पर उन्हें भी देखना पड़ता है।

नेत्र रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी इमरजेंसी में होने के कारण सोमवार को नेत्र रोग विभाग की ओपीडी भी बंद रही है। इतना नहीं, अगले 7 दिनों तक भी नेत्र रोग की ओपीडी बंद ही रहेगी क्योंकि अगले 3 दिनों तक कोर्ट ड्यूटी और उसके बाद 4 दिनों तक डाॅक्टर छुट्टी पर रहेंगी। इसी तरह फिजिशियन डाॅ. पायल छुट्टी पर हैं और दूसरे फिजिशियन मीटिंगों में व्यस्त रहे। सिर्फ एक फिजिशियन ही ओपीडी में बैठे रहे और मरीजों को बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

6 कंसल्टेंट 30 सितंबर को रिलीव कर दिए थे

रिटायरमेंट के बाद भी नियमित रूप से सेवाएं दे रहे कंसल्टेंट को हटाने के आदेश दिए थे। आदेशों के बाद कैथल से 6 कंसल्टेंट को 30 सितंबर को रिलीव कर दिया गया। इसके अलावा 60 दिनों की डेपुटेशन पर भेजे गए डाॅ. मनप्रीत कौर, डाॅ. नवराज और डाॅ. सचिन मांडले को भी एक अक्टूबर को रिलीव कर दिया गया। जींद से डेपुटेशन पर एमबीबीएस डाॅ. पंकज का भी तबादला कर दिया गया।

अधिकारियों व डाॅक्टरों के पद

पद संख्या उपलब्ध
पीएमओ – 01 – 00
एसएमओ – 05 – 02
मेडिकल ऑफिसर – 55 – 13

जिला अस्पताल के हालात मरीजों की जुबानी

गर्भवती हूं और 9वां महीना चल रहा है। सुबह 8 बजे आकर पर्ची बनवाने के बाद जब पहुंचे तो बोले कि इतने मरीजों को आज नहीं देख सकते अब कल आना। उनको सिर्फ डाॅक्टर से अल्ट्रासाउंड के लिए लिखवाना था ताकि वह अल्ट्रासाउंड करवा सके।रेखा, गांव कुतबपुर

रविवार को सड़क दुर्घटना में चोट लग गई थी। एक्स-रे करवाया तो फिल्में नहीं थी, किसी तरह डाॅक्टर के पास सीधे एक्स-रे भेजा गया। सिटी स्कैन करवाने गए तो वहां मशीन खराब थी। पिछले करीब एक घंटे से सर्जरी के डाॅक्टर के इंतजार में व्हील चेयर पर हूं, लेकिन डाॅक्टर नहीं मिले।-जसवंत राना, बालाजी कॉलोनी, कैथल।

आदेशों के बाद ही डाॅक्टरों को रिलीव किया गया है। वो उनके हाथ में नहीं था। डाॅक्टरों की डिमांड भेजी गई है। जब तक नहीं आ जाते सेवाएं प्रभावित रहेंगी। डाॅक्टरों को भी एक साथ छुट्टी नहीं दी जा रही है। गायनी में मरीज ज्यादा हैं और डाॅक्टरों की भारी कमी है। 2 डाॅक्टर डेपुटेशन पर हैं, लेकिन उनमें से डाॅ. हमिता डे और नाइट के ड्यूटी के बाद छुट्टी पर हैं। डाॅ. सोनाली सिंगला अकेले ओपीडी देख रहे थे। उनके ऊपर प्रशासनिक व ओटी की भी जिम्मेदारी है।-डाॅ. रेनु चावला, कार्यकारी पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल।

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